शरीर पर फट चुके थे 2 ग्रेनेड, धंसी थी कई गोलियां, तभी आई रहस्यमयी आवाज

अब तक दुश्मन के दो ग्रेनेड शरीर पर आकर फट चुके थे. एक ग्रेनेड से घुटने से नीचे का एक पैर बुरी तरह से जख्मी हो गया था, दूसरे ग्रेनेड ने नाक से कार तक चीरा लगा दिया था. यातना यहीं पर खत्म नहीं हुई. वह मरा कि नहीं, यह जानने के लिए पाकिस्तानी सैनिकों ने पहली गोली बाजू पर, दूसरे गोली जांघ पर और तीसरी गोली सीने पर चला दी. दो ग्रेनेड और इतनी गोलियां झेलने के बाद किसी का भी बचना असंभव सा था. लेकिन उस दिन ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर था. असंभव न केवल संभव हुआ, ऐसी हालत में भारतीय सेना के इस जांबाज ने पाकिस्तान के आधा दर्जन सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया.
नीचे मौजूद भारतीय सेना फिर हमला करने की तैयारी कर रही होगी. क्या उनके साथ भी हमारे जैसा…. दिल से फिर एक आवाज आई- नहीं नहीं… मुझे ही कुछ करना होगा. मैं अपने साथियों की जान ऐसे जया होने नहीं दे सकता. इसके बाद वह एक बार फिर रेंगते हुए आगे बढ़ा और ऐसी जगह पर पहुंच गया, जहां से यह समझ नहीं आ रहा था कि किधर जाऊं. किधर भारत है और किधर पाकिस्तान. दुविधा के कुछ पल बीते ही होंगे, तभी एक पहाड़ों से एक रहस्यमयी आवाज आई- बेटा! इस नाले में कूद जा. इस रहस्यमीय आवाज सुनने के बाद कुछ समय में नहीं आया और वह नाले में कूद गया.
इलाज भी शुरू हो चुका था. थोड़ी थोड़ी चेतना फिर वापस आने लगी थी. तभी कान में एक आवाज गूंजी. बेटा कुछ पहचानता है. जवाब में वह बोला- साहब! कुछ नजर नहीं आ रहा, सिर्फ आवाज सुनाई दे रही है. सामने से फिर आवाज आई- बेटा! मैं तेरा कमांडिंग ऑफिसर कर्नल खुशाल चंद्र ठाकुर. बेटा! कुछ बता सकता है क्या? जवाब मिला- हां साहब बता सकता हूं. फिर एक-एक कर उसने ऊपर के पूरे हालात बयां किए. कर्नल साहब ने फिर पूछा- ऊपर जरूरत क्या क्या है? जवाब मिला- साहब! सिर्फ एम्युनिशन और फील्ड पट्टी. क्यों खाने के लिए कुछ नहीं चाहिए, कर्नल साहब ने पूछा.




