छत्तीसगढ़

पशु चिकित्सालयों में पालतू पशुओं का नियमित : उपचार: उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें कांकेर

 रायपुर, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें कांकेर ने बताया कि जिले के पशु चिकित्सालयों में छोटे-बड़े पालतू पशुओं का नियमित उपचार किया जा रहा है। उन्होंने जिले के एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर ’’15 साल पहले भवन बना, आज तक शुरु नहीं हो पाया पॉली क्लिनिक’’ के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2010-11 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत पॉली क्लिनिक भवन निर्माण के लिए 16.50 लाख रूपए की स्वीकृति प्राप्त हुआ था, जिससे पॉली क्लिनिक भवन निर्माण किया गया, किन्तु शासन स्तर पर पद सरंचना स्वीकृत नहीं होने के कारण उक्त पॉली क्लिनिक प्रारंभ नहीं हो पाया है। पॉली क्लिनिक भवन के लिए पद सरंचना स्वीकृत नहीं होने के कारण एक्स-रे मशीन, ऑपरेशन थियेटर, सोनोग्राफी मशीन क्रय नहीं किया गया है। इसलिए उक्त भवन के रख-रखाव को दृष्टिगत् रखते हुए कार्यालयीन भण्डार शाखा एवं अन्य शाखा उपयोग कार्यालय द्वारा किया जा रहा है।

उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें कांकेर ने बताया कि जिला पशु चिकित्सालय में सभी प्रकार के छोटे एवं बडे़ पालतू पशुओं का उपचार एवं शल्य क्रिया किया जा रहा है, इसलिए चिकित्सकीय कार्य प्रभावित नहीं हो रहा है। साथ ही केन्द्र एवं राज्य शासन द्वारा संचालित मोबाईल वेटनरी यूनिट जिले के सभी 07 विकासखण्डों में टोल फ्री नम्बर 1962 भी संचालित है, जिसके माध्यम से त्वरित उपचार की सुविधा भी जन सामान्य को उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के 39 पद स्वीकृत हैं, जिसके विरुद्ध 32 पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ कार्यरत हैं। इसी प्रकार जिले में पशु चिकित्सा विशेषज्ञ के लगभग 82 प्रतिशत पद भरे हुए हैं। पशु चिकित्सालय आमाबेड़ा में पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ की पदस्थापना नहीं होने के कारण अन्य संस्था से व्यवस्था कर कार्य संचालित किया जा रहा है, इस संस्था में कर्मचारी पहले से पदस्थ है। पशु चिकित्सालय कोयलीबेड़ा का प्रभार विकासखण्ड में पदस्थ पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ को सौंपा गया है। इसी प्रकार पशु चिकित्सालय हाटकांदल में पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ का कार्य प्रभारी मोटर साइकिल इकाई दुर्गूकोंदल के द्वारा किया जाकर विभागीय कार्य जैसे पशु उपचार, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान एवं अन्य विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उप संचालक ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले के अंतर्गत संचालित पशु चिकित्सा संस्थाओं में पद रिक्त होने की स्थिति में अन्य संस्थाओं से अधिकारी-कर्मचारियों की व्यवस्था कर कार्य को संचालित किया जा रहा है।

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