छत्तीसगढ़

नियद नेल्ला नार योजना से संवर रही वनांचल की राह

रायपुर, नियद नेल्ला नार योजना ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब सरकार संवेदना, अवसर और कौशल के साथ लोगों तक पहुँचती है, तो बदलाव सिर्फ संभव ही नहीं बल्कि सुनिश्चित होता है। छत्तीसगढ के बस्तर की यह परिवर्तन यात्रा आने वाले समय में शांति, विकास और समृद्धि की स्थायी नींव तैयार करेगी। सुदूर वनांचल क्षेत्रों में शासन की योजनाएं अब ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग के संयुक्त प्रयासों से सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बंडा के ग्रामीणों को आजीविका का नया अवसर मिला है।

छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी नियद नेल्ला नार योजना एवं सुकर त्रई योजना के अंतर्गत ग्राम बंडा के अनुसूचित जनजाति वर्ग के 10 चयनित ग्रामीणों को उन्नत नस्ल के सुकर प्रदान किए गए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की आय बढ़ाना, उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना तथा आत्मनिर्भर बनाना है। सुकर पालन योजना के अंतर्गत उन्नत नस्ल के 1 नर और 2 मादा सुकर (कुल 3) सुकर प्रदान किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य विशिष्ट जाति/जन जाति के पशुपालकों को शामिल करना है। इस योजना में 90% तक का सरकारी अनुदान (सब्सिडी) शामिल है, जो छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संगठित करने के लिए संचालित

सुकमा कलेक्टर के निर्देश और पशुपालन विभाग के उपसंचालक के मार्गदर्शन में कोंटा पशु चिकित्सालय की टीम ने ग्राम में पहुंचकर सुकर पालकों को सुकरों का वितरण किया। इस दौरान हितग्राहियों को सुकर पालन की सही विधि, संतुलित आहार, स्वास्थ्य देखभाल और बेहतर प्रबंधन की जानकारी भी दी गई, ताकि वे इस कार्य से नियमित आय अर्जित कर सकें। योजना से लाभान्वित ग्रामीणों ने बताया कि अब उन्हें गांव में ही रोजगार का अवसर मिल रहा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी। ग्रामीणों ने शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना से उनके जीवन में नई उम्मीद जगी है।

प्रशासन का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ, दुर्गम और संचारविहीन क्षेत्रों में लोगों को शासन की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। इस प्रकार नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से वनांचल क्षेत्रों में आजीविका के नए रास्ते खुल रहे हैं और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगा है, जो उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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