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ट्रंप का टैरिफ भारत के लिए आपदा या अवसर? आनंद महिंद्रा ने समझाया, इस बात पर किया आगाह

डोनाल्‍ड ट्रंप द्वारा टैरिफ वॉर की शुरुआत करने के बाद चीन और अमेरिका दोनों में तलवारें खिंच गई हैं. चीन की तरफ से भी अमेरिका पर बराबरी का टैरिफ लगा दिया गया है. ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे पर भारत के संपर्क में है. कोशिशें चल रही हैं कि भारत भी अमेरिका पर लगे टैरिफ को कुछ कम कर दे. इसी बीच भारत के जाने माने उद्योगपति आनंद महिंद्रा को आपदा में बड़ा अवसर नजर आने लगा है. उन्होंने एक ऐसी भविष्‍यवाणी कर दी है, जो जानकर हर किसी भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा. महिंद्रा ने कहा कि वो वक्‍त जल्‍द आने वाला है जब भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन जाएगा. हमें बस जल्‍दबाजी में कोई गलत कम उठाने से बचना होगा.

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर महिंद्रा ने डोनाल्‍ड ट्रंप के टैरिफ वॉर पर भारत सरकार को पैनिक कर कोई गलत कदम नहीं उठाने की सलाह दी. साथ ही कहा कि ऐसी संभावनाएं बन रही हैं, जिसमें भारत दुनिया को लीड करने की दिशा में आगे बढ़ेगा. महिंद्रा ने एक्‍स पर लिखा, ‘अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ का दुनिया पर क्या असर होगा, इस पर आज हर तरफ चर्चा हो रही है. खासकर चीन को लेकर लोग काफी कुछ अंदाजा लगा रहे हैं. चीन इस पर क्या रिएक्शन देगा? (चीन ने आज ही जवाबी कार्रवाई में कड़े टैरिफ का ऐलान कर दिया है) और एक नए वर्ल्‍ड ऑडर में उसे कैसे फायदा होगा

भारत साबित होगा छुपा रुस्‍तम
अपने इस पोस्‍ट में आनंद महिंद्रा ने आगे कहा, ‘माना कि इस पूरी चर्चा में भारत का नाम बहुत ज़्यादा नहीं लिया जा रहा है लेकिन मेरा मानना ​​है कि ज़्यादातर लोग इस बात पर गौर नहीं कर रहे हैं कि अब ज़्यादा समय नहीं रहा, जब भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और वह भी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के तौर पर. भारत की स्थिति इस मामले में काफी मज़बूत है क्योंकि यहां घरेलू खपत बहुत ज़्यादा है और सप्लाई चेन भी काफी हद तक भारत के अंदर ही है. ऐसे में भारत के पास एक नई मल्‍टी-पोलर (बहुध्रुवीय) दुनिया के एक प्रमुख ‘ध्रुव’ बनने का बहुत बड़ा मौका है.’

मौके का फायदा उठाने का वक्‍त
आनंद महिला ने कहा कि हमें नए टैरिफ पर सोच-समझकर रिएक्ट करना चाहिए और ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे हमारे दीर्घकालिक, रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचे. हमें ऐसी नीतियां बनाने की जरूरत है जिन्हें हम तुरंत लागू कर सकें. हमें मौजूदा हालात का फायदा उठाना होगा और दुनिया भर के देशों के लिए सबसे पहले और सबसे भरोसेमंद आर्थिक भागीदार के रूप में उभरना होगा.

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