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कुर्सी गई पर फितरत नहीं! जस्टिन ट्रूडो ने फिर दिखाई नीचता, अपने ही सांसद को दी भारत से दोस्ती की सजा

कुछ लोग नीयत से ही ढीठ होते हैं. रस्सी जल जाती है पर बल नहीं जाता. कनाडा के पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो कुछ ऐसे ही हैं. भारत से वह तो बेहतर संबंध नहीं रख पाए, मगर कनाडा में जिसने ऐसा किया, उसके पर कतरने में लगे हैं. जी हां, भारत से बेहतर संबंध रखने वाले भारतीय मूल के एक सांसद का जस्टिन ट्रूडो की पार्टी ने टिकट काट दिया है. कनाडा की लिबरल पार्टी ने भारतीय मूल के सांसद चंद्र आर्य को पार्टी लीडरशिप के लिए चुनाव लड़ने और उनके ओटावा नेपियन क्षेत्र से दोबारा चुनाव लड़ने के लिए नॉमिनेशन देने से रोक दिया है.

ट्रूडो की पार्टी का यह फैसला इसलिए भी हैरानी भरा है, क्योंकि सांसद चंद्र आर्य का भारत से कनेक्शन है. वह भारतीय मूल के हैं. वह भारत से बेहतर संबंध रखने की वकालत करते रहे हैं. जब भारत और कनाडा के रिश्तों में तल्खी है, तब भी वह भारत से बेहतर संबंध की बात करते रहे हैं. ट्रूडो की पार्टी सांसद चंद्र आर्य पर भारत सरकार से संबंध होने के आरोप लगाती रही है.पिछले साल भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात का भी जिक्र किया जा रहा है.

भारत से दोस्ती की कीमत चुकानी पड़ी!
द ग्लोब एंड मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सांसद चंद्र आर्य ने कनाडा और भारत के बीच तल्ख रिश्तों के बावजूद भारत यात्रा की जानकारी कनाडा सरकार को नहीं दी थी. रिपोर्ट में गोपनीय मंजूरी रखने वाले सूत्रों का हवाला दिया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा सरकार और लिबरल पार्टी, दोनों ने ही आर्य को लीडरशिप की रेस और दोबारा चुनाव लड़ने से रोकने की कोई खास वजह नहीं बताई है. सूत्रों ने यह भी खुलासा किया कि कनाडा की खुफिया एजेंसी (CSIS) ने सरकार को सांसद आर्य के भारत सरकार से कथित तौर पर करीबी रिश्तों की जानकारी दी थी. इन रिश्तों में ओटावा में भारतीय उच्चायोग भी शामिल है. सुरक्षा मंजूरी रखने वाले पार्टी अधिकारियों ने भी विदेशी हस्तक्षेप पर एक सामान्य ब्रीफिंग मिलने के बाद आर्य को लेकर चिंता जताई थी.

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