छत्तीसगढ़

एक सपना पक्के घर का, जो हो रहा पूरा

रोटी, कपड़ा और मकान जीवन की आधारभूत आवश्यकताओं में से एक है। समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार को सभी मौसम (गर्मी, ठंड और बरसात) से बचाते हुए लगातार प्रयासरत रहता है कि वह परिवार की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकुशल जीवन यापन कर सके। अपने परिवार को सुरक्षित रखने और समाज में जीवन स्तर को बेहतर बनाए रखने के लिए खुद का पक्का घर भी बहुत जरूरी है। ग्रामीण अंचलों में लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण पक्का घर बनाने का सपना जल्द पूरा नहीं हो पता है। जिले के मैदानी क्षेत्र से लेकर वनांचल एवं दुर्गम स्थानों में रहने वाले ग्रामीण भाई बहनों को अपने आशियाने के लिए परेशान ना होना पड़े और उन्हें सम्मान व सुरक्षा के साथ सुखद जीवन देने का सपना छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने देखा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल और उप मुख्यमंत्री के संघर्षों का फल है कि कबीरधाम जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण एवं जनमन आवास अंतर्गत 18 महीने के अल्प समय में 60184 से अधिक आवास स्वीकृत होकर निर्माण का वृहद अभियान लगातार चल रहा है और अब योजना के सकारात्मक नतीजे भी सबके सामने है जिसमे हजारों ग्रामीण आवासहीन परिवार अपने पक्के आवास में परिवार सहित सकुशल जीवन यापन कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण पर एक नजर…..

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के लगातार प्रयासों का नतीजा है कि जिले में दिसंबर 2023 से 59280 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास देने के लिए लक्ष्य रखा गया। अल्प समय में 50559 ग्रामीण परिवारों को प्रति परिवार की दर से 1.20 रुपए की लागत से प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर उनके जीवन में अपार खुशियों की सौगात दी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत निरंतर कार्य करते हुए निर्माण कार्य को पूरी गति से आगे बढ़ाया गया। जिसका सुखद परिणाम है कि सिर्फ डेढ़ वर्ष के अंदर ही 24320 ग्रामीण परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास का निर्माण पूरा हो गया। अब यह परिवार खुशी से अपने पक्के घर में निवास कर रहे हैं। इसके साथ ही 26239 ग्रामीण परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास बनाने का कार्य भी पूरी गति से चल रहा है। उल्लेखनीय है कि सभी आवासों का निर्माण हितग्राही स्वयं कर रहे हैं और पैसा उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से सीधे जारी हो रहा है।

मैदानी क्षेत्रों में बन रहे पक्के आवासों की बानगी आज देखते ही बनती है। ग्राम पंचायत खैरबनाकला में 222 परिवारों के लिए आवास स्वीकृत हुए जिनमें से 179 पूरे हो गए। इसी तरह से राजानवागांव में 190 में से 151, खारा में 198 में से 107,मण्डलाटोला में 146 में से 109, केसली में 139 में से 123, भागुटोला 133 में से 109, पनेका 114 में से 102, डाबरी 209 में से 172, किसुनगढ़ 201 में से 170, कुआंमलगी 219 में से 161, पेंड्रीखुर्द 185 में से 128, सुकतरा 110 में से 105, कुमार दनिया 139 में से 114 धरमगढ़ 137 में से 122 हथलेवा 138 में से 124 परिवार अब अपने नए घरों में खुशी से जीवन यापन कर रहे हैं। यहां आंकड़े तो सिर्फ कुछ ग्राम पंचायतो के हैं जिले के अधिकांश ग्राम पंचायतो में हजारों आवास बन गए है और ग्रामीण परिवार इसे सीधे लाभान्वित हो रहा है।

सुख, समृद्धि और विकास की नहीं रहा प्रधानमंत्री जनमन आवास के कार्यो पर एक नजर….!

यह उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा का ही सपना था कि हमारे बैगा समुदाय के लोगों को उनका अपना पक्का घर मिले जो वनांचल, पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रो में रहते है। विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा परिवारों को विकास के मुख्य धारा में जोड़ने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। यही कारण है कि पूरे प्रदेश में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना अंतर्गत सर्वाधिक आवास निर्माण की स्वीकृति कबीरधाम जिले में दी गई है। आज ज़िले के वनांचल क्षेत्रो में 9625 बैगा परिवारों के लिए 2 लाख रुपए प्रति परिवार की दर से जनमन आवास स्वीकृत हुआ है। विषम परिस्थितियों में कार्य करते हुए 3513 बैगा परिवारों का अपना पक्का घर बन चुका है और वह खुशी-खुशी इन घरों में रह रहे हैं। जनमन आवास के निर्माण में 95 दिवस का रोजगार महात्मा गांधी नरेगा योजना द्वारा अलग से प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही शौचालय की सुविधा,राशन कार्ड, आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत स्वास्थ्य कार्ड, महतारी वंदन योजना जैसे प्रमुख योजनाओं से इन्हें जोड़ा गया है। वनांचल क्षेत्र के ग्राम पंचायत के केसमर्दा में 272 स्वीकृत आवास में से 118 घर पूर्ण हो गए हैं, इसी तरह ढोलबज्जा के 248 में से 164, लूप 241 में से 109, तेलियापानी लेदार 384 में से 84 अमनिया 333 में से 85 भेलकी 239 में से 85 डालामहुआ 240 में से 90 जनमन आवास का निर्माण पूरा हो चुका है और बैगा परिवार इसमें खुशी से जीवन यापन कर रहा है। इसी तरह जनमन आवास और भी अन्य ग्राम पंचायतो में बड़ी मात्रा में बनाए जा चुके हैं और इसका लाभ ग्रामीण बैगा परिवार उठा रहे हैं।

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