छत्तीसगढ़

कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधार और दूध उत्पादन में बढ़ोतरी

रायपुर,   प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत दंतेवाड़ा जिले में पशुधन विकास को वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाने के प्रयास लगातार सफल हो रहे हैं। इसी का परिणाम है बंगाली कैंप, भांसी के पशुपालक श्री गौरंग पाल (पिता श्री गोविंद पाल) की उल्लेखनीय सफलता, जो आज क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।

पशुधन विकास विभाग, दंतेवाड़ा द्वारा प्रदान की जा रही कृत्रिम गर्भाधान सुविधा का लाभ उठाते हुए श्री गौरंग पाल ने अपनी डेयरी को नया रूप दिया है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से अब तक 09 स्वस्थ बछड़े-बछिया जन्म ले चुके हैं, जिससे पशुओं की नस्ल में सुधार हुआ है और दूध उत्पादन क्षमता में भी स्पष्ट बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्तमान में उनकी डेयरी से प्रतिदिन लगभग 100 लीटर दूध उत्पादन हो रहा है, जिसे वे 70 रुपए प्रति लीटर की दर से विक्रय कर नियमित एवं संतोषजनक आय प्राप्त कर रहे हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत हुई है।

10 जनवरी 2026 को विभाग द्वारा उनके पशुओं में हीट सिंक्रोनाइजेशन (ऊष्मा समकालिकरण) तकनीक के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान किया गया। इस तकनीक से पशुओं में समयबद्ध और प्रभावी प्रजनन सुनिश्चित हुआ, जिससे डेयरी संचालन अधिक वैज्ञानिक, सुव्यवस्थित और उत्पादक बन सका।

श्री गौरंग पाल की सफलता दंतेवाड़ा जिले के अन्य पशुपालकों के लिए प्रेरक संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और वैज्ञानिक तकनीकों का अपनाने से पशुपालन को एक मजबूत आजीविका मॉडल बनाया जा सकता है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और पशुधन विकास विभाग की पहल ने पशुपालकों के बीच विश्वास बढ़ाया है और जिले में पशुपालन को आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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