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भारत से रूठने लगा सूरज, चमक पड़ गई फीकी, संकट की आहट देख वैज्ञानिक भी हैरान

प्रकृति से खिलवाड़ का असर दिखने लगा है. इससे दुनिया के हर देश और क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं. अब अपना ही देश देखिए ना. इस साल मानसून के सीजन में देश के उत्तरी हिस्से में कई जगहों पर औसत से काफी अधिक बारिश हुई. वहीं पूर्वी भारत पूरे मानसून में बारिश के लिए तरसता रहा. फिर लौटते-लौटते वहां भी मानसून ने बड़ी तबाही मचा दी. बिहार और पश्चिम बंगाल में मानसून के अंतिम दिनों में भारी बारिश हुई. मौसम में यह बदला यूं नहीं हो रहा है. इसके पीछे गहरे कारण सामने आ रहे हैं. इस बीच एक और चिंतित करने वाली स्टडी आई है. इसके मुताबिक भारत के भूभाग में सूरज की चमक फीकी पड़ने लगी है. एक तरह से भारत से सूरज रूठने लगा है. पूरे इलाके में धूप के घंटों में बड़ी कमी आई है. ऐसे में संकट की इस आहट से वैज्ञानिक बेचैन हो गए हैं.

दरअसल, इस साल की लंबी मानसून और लगातार छाए बादलों से ऐसा महसूस हुआ कि मानो सूरज कहीं खो गया हो. लेकिन अब एक नई वैज्ञानिक स्टडी ने इस धारणा को डेटा से पुष्ट किया है. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू), पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) और इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) जैसे संस्थानों के वैज्ञानिकों के एक संयुक्त अध्ययन में पाया गया है कि भारत के अधिकतर हिस्सों में पिछले तीन दशकों से धूप के घंटे लगातार घट रहे हैं. इसका प्रमुख कारण मोटे बादल और बढ़ता एरोसोल प्रदूषण है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह शोध इस महीने नेचर की साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है. अध्ययन में 1988 से 2018 तक नौ क्षेत्रों के 20 मौसम स्टेशनों से धूप घंटों के डेटा का विश्लेषण किया गया. धूप घंटे वे होते हैं जब सूर्य की किरणें इतनी तेज होती हैं कि उन्हें रिकॉर्ड किया जा सके. निष्कर्षों के अनुसार सभी क्षेत्रों में सालाना धूप घंटे घटी हैं, सिवाय पूर्वोत्तर भारत के जहां मौसमी स्तर पर मामूली स्थिरता देखी गई.

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