छत्तीसगढ़

ओपीडी छोड़ साइकिल स्टेंड पर मरीजों का इलाज, डॉक्टरों का आंदोलन तेज….

छत्तीसगढ़ में जांजगीर चांपा जिला के जिला अस्पताल में सिविल सर्जन दीपक जायसवाल के खिलाफ डॉक्टरों ने आंदोलन तेज कर दिया है. डॉक्टरों ने जिला अस्पताल की ओपीडी का बहिष्कार कर दिया है.हाथ में काला फीता बांध कर जिला अस्पताल के साइकिल स्टेंड में अलग ओपीडी शुरू कर दी है. जमीन पर बैठ कर मरीजों का उपचार कर रहे हैं.

डॉक्टर अपने चेम्बर को छोड़ कर साइकिल स्टेण्ड से मरीजों का निःशुल्क इलाज कर रहे हैं. एक मरीज के परिजन मनबोध साहू ने बताया कि पैर में सूजन की वजह से चेक कराने आए हैं. चेकअप कराया है. दवाई लिखे हैं.
मरीजों को आंदोलनकारी डॉक्टरों की पर्ची से जिला अस्पताल से ना तो दवा मिल रही है और ना ही कोई जांच हो रही है. वहीं डॉक्टरों के आंदोलन को देखते हुए सिविल सर्जन ने खुद ही ओपीडी संभाल ली है. सिविल सर्जन और एक डॉक्टर ओपीडी के अंदर इलाज कर रहे हैं.

आंदोलन में शामिल जिला अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ पुष्पेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि हर साल 800-900 कैंसर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. हर साल 300-400 कीमोथैरेपी की सुविधा दे रहे हैं. जिला अस्पताल की मंथली ओपीडी 15 से 20 हजार है. इसका मतलब यह है कि कर्मचारी नियम के मुताबिक काम कर रहे हैं.
डॉ पुष्पेंद्र पटेल कहते हैं कि डर कर काम नहीं करना चाहते हैं. हमें कठोर कदम उठाना पड़ा लेकिन अब भी हम मरीजों को चेक कर रहे हैं. हम चाहते हैं कि एक अच्छा माहौल मिले ताकि हम बेहतर इलाज कर सकें.
दरअसल जांजगीर चांपा जिला अस्पताल में एक सप्ताह से सिविल सर्जन और डॉक्टर के साथ स्टॉफ नर्स का विरोध जारी है. सिविल सर्जन दीपक जायसवाल पर डॉक्टर और नर्सिंग स्टॉफ का अपमान करने और जिला अस्पताल में तनाव पूर्ण माहौल बनाने का आरोप है. अब डॉक्टर शासन प्रशासन से सिविल सर्जन को हटाने की मांग कर रहे है.

छत्तीसगढ़ डॉक्टर एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ इकबाल हुसैन ने कहा कि हमारी मांगें नहीं मानी गई तो उग्र आंदोलन पर विचार करेंगे. सिविल सर्जन दीपक जायसवाल के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर जिला अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी संघ के बीच आंदोलन को लेकर बैठक भी है, जिसमें आंदोलन को लेकर चर्चा होनी है.

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